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Bihar News: स्कूलों में मिड डे-मील की डिजिटल निगरानी, बच्चों की फेस स्कैनिंग से तय होगा राशन; 11 बजे तक डेटा जरूरी

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Bihar Education News | बिहार के सरकारी स्कूलों में मिड डे-मील की निगरानी अब डिजिटल तरीके से होगी। ई-शिक्षाकोष के नए वर्जन में फेस स्कैन और वीडियो रिकॉर्डिंग से बच्चों की वास्तविक संख्या दर्ज होगी।

पटना, 8 अगस्त। बिहार के सरकारी स्कूलों में बच्चों को मिलने वाले मिड डे-मील यानी पोषाहार की व्यवस्था अब डिजिटल निगरानी के दायरे में आने जा रही है। शिक्षा विभाग ने ई-शिक्षाकोष एप का नया वर्जन 3.6.0 जारी किया है। नई व्यवस्था में स्कूलों में मौजूद बच्चों की संख्या, भोजन करने वाले विद्यार्थियों की संख्या और पोषाहार से जुड़ी अन्य जानकारियां डिजिटल माध्यम से दर्ज की जाएंगी।

इस व्यवस्था का सबसे अहम हिस्सा बच्चों की वास्तविक संख्या का रिकॉर्ड तैयार करना है। इसके लिए एप में फेस स्कैनिंग और वीडियो रिकॉर्डिंग जैसी सुविधाएं जोड़ी गई हैं। विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि स्कूलों में जितने बच्चे वास्तव में मौजूद हैं, पोषाहार की गणना और राशन की जरूरत भी उसी संख्या के आधार पर तय हो।

1.09 करोड़ बच्चों से जुड़ा होगा डिजिटल रिकॉर्ड

बिहार के सरकारी स्कूलों में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को पोषाहार उपलब्ध कराया जाता है। विभाग के आंकड़ों के अनुसार करीब 1.09 करोड़ बच्चों से जुड़ी भोजन व्यवस्था को डिजिटल रिकॉर्ड से जोड़ा जाना है।

नई प्रणाली लागू होने के बाद स्कूल स्तर पर बच्चों की उपस्थिति और मिड डे-मील वितरण का रिकॉर्ड केवल कागजी रजिस्टर तक सीमित नहीं रहेगा। रोजाना की जानकारी एप के माध्यम से विभागीय सिस्टम तक पहुंचाई जाएगी।

प्रधानाध्यापक की जिम्मेदारी बढ़ेगी

नई व्यवस्था में स्कूल के प्रधानाध्यापक की जिम्मेदारी भी तय की गई है। प्रत्येक कार्यदिवस में सुबह 11 बजे तक संबंधित जानकारी ई-शिक्षाकोष एप पर अपलोड करनी होगी।

इसमें स्कूल में उपस्थित बच्चों की संख्या, भोजन करने वाले विद्यार्थियों का विवरण और पोषाहार से संबंधित जरूरी जानकारी शामिल होगी। निर्धारित समय तक डेटा अपलोड नहीं करने की स्थिति में संबंधित प्रधानाध्यापक के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रावधान रखा गया है।

फेस स्कैनिंग से सामने आएगी वास्तविक संख्या

मिड डे-मील व्यवस्था में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव विद्यार्थियों की संख्या दर्ज करने के तरीके में किया जा रहा है। अब केवल रजिस्टर में लिखी गई संख्या पर निर्भर रहने के बजाय डिजिटल माध्यम से वास्तविक उपस्थिति का रिकॉर्ड तैयार करने की कोशिश होगी।

फेस स्कैनिंग और वीडियो रिकॉर्डिंग के जरिए स्कूल में मौजूद बच्चों की संख्या का डिजिटल सत्यापन किया जाएगा। इससे विभाग को यह समझने में मदद मिलेगी कि किसी दिन वास्तव में कितने बच्चे स्कूल पहुंचे और कितने विद्यार्थियों ने पोषाहार ग्रहण किया।

राशन की गणना भी उपस्थिति से जुड़ेगी

बच्चों की वास्तविक संख्या का असर सीधे पोषाहार के लिए आवश्यक राशन की गणना पर पड़ेगा। यानी स्कूल में जितने बच्चे मौजूद होंगे, उसी के अनुरूप भोजन और खाद्यान्न की आवश्यकता निर्धारित करने की व्यवस्था विकसित की जा रही है।

इसका उद्देश्य अतिरिक्त बच्चों की संख्या दिखाकर अधिक राशन या राशि प्राप्त करने की संभावित गड़बड़ियों को कम करना है।

विभाग को लंबे समय से मिलती रही हैं शिकायतें

मिड डे-मील व्यवस्था में विद्यार्थियों की संख्या को लेकर पहले भी अलग-अलग स्तर पर शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसी शिकायतों में आरोप रहता है कि कुछ स्थानों पर वास्तविक उपस्थिति से अधिक संख्या रिकॉर्ड में दर्ज कर दी जाती है।

डिजिटल निगरानी व्यवस्था इसी तरह की संभावित अनियमितताओं पर नियंत्रण लगाने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है।

अब रिकॉर्ड केवल रजिस्टर पर निर्भर नहीं रहेगा। डिजिटल डेटा उपलब्ध रहने से विभाग जरूरत पड़ने पर स्कूल स्तर पर दर्ज जानकारी की समीक्षा और जांच कर सकेगा।

वीडियो से भी होगी निगरानी

ई-शिक्षाकोष के नए वर्जन में वीडियो रिकॉर्डिंग की सुविधा भी शामिल की गई है। इसका इस्तेमाल स्कूल में विद्यार्थियों की वास्तविक उपस्थिति से जुड़े रिकॉर्ड को मजबूत करने के लिए किया जाएगा।

डिजिटल रिकॉर्ड के जरिए विभाग के पास यह जानकारी उपलब्ध रह सकेगी कि किस स्कूल में कितने विद्यार्थी मौजूद थे और उस दिन कितने बच्चों के लिए पोषाहार की व्यवस्था की गई।

भोजन की गुणवत्ता की जानकारी भी होगी दर्ज

नई व्यवस्था सिर्फ बच्चों की संख्या तक सीमित नहीं है। मिड डे-मील से संबंधित अन्य जरूरी जानकारियां भी एप पर दर्ज की जाएंगी।

इसमें भोजन की गुणवत्ता से संबंधित विवरण भी शामिल रहेगा। इससे पोषाहार व्यवस्था की निगरानी को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म से संचालित करने में मदद मिलेगी।

मिड डे-मील निदेशक विनायक मिश्र के अनुसार, नई व्यवस्था का उद्देश्य पोषाहार वितरण में पारदर्शिता बढ़ाना और रिकॉर्ड को बेहतर तरीके से व्यवस्थित करना है।

सरकारी राशन के इस्तेमाल पर भी नजर

मिड डे-मील में विद्यार्थियों की वास्तविक संख्या का सही रिकॉर्ड होने से सरकारी खाद्यान्न के इस्तेमाल की निगरानी भी मजबूत हो सकती है। वास्तविक जरूरत के आधार पर राशन की गणना होने पर अतिरिक्त आवंटन या रिकॉर्ड में अंतर की संभावना कम करने में मदद मिल सकती है।

साथ ही विभाग के लिए यह देखना आसान होगा कि स्कूलों में उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल विद्यार्थियों की वास्तविक संख्या के अनुरूप हो रहा है या नहीं।

डिजिटल व्यवस्था से बढ़ेगी जवाबदेही

नई व्यवस्था का एक अहम पहलू जवाबदेही से जुड़ा है। जब स्कूल की रोजाना की जानकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्ज होगी तो रिकॉर्ड में बदलाव और अनियमितता की निगरानी पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित तरीके से की जा सकेगी।

प्रधानाध्यापक को निर्धारित समय के भीतर डेटा अपलोड करना होगा। इससे स्कूल स्तर पर पोषाहार व्यवस्था की दैनिक निगरानी की जिम्मेदारी भी स्पष्ट होगी।

कागजी रिकॉर्ड से डिजिटल सिस्टम की ओर बढ़ता कदम

बिहार में मिड डे-मील व्यवस्था को डिजिटल बनाने की पहल शिक्षा विभाग की व्यापक डिजिटल निगरानी व्यवस्था का हिस्सा है। इसका मकसद स्कूलों में विद्यार्थियों की उपस्थिति और पोषाहार वितरण के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना है।

अगर फेस स्कैनिंग, वीडियो रिकॉर्डिंग और रोजाना डेटा अपलोड करने की व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो पोषाहार से जुड़े रिकॉर्ड में पारदर्शिता बढ़ सकती है।

हालांकि, नई व्यवस्था की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि स्कूलों में तकनीकी सुविधाएं कितनी बेहतर उपलब्ध हैं और शिक्षक व प्रधानाध्यापक डिजिटल सिस्टम का नियमित रूप से कितना प्रभावी इस्तेमाल कर पाते हैं।

कुल मिलाकर बिहार सरकार अब मिड डे-मील की निगरानी को कागजी रजिस्टर से आगे ले जाकर डिजिटल सिस्टम से जोड़ रही है। वास्तविक उपस्थिति के आधार पर राशन की जरूरत तय करने और रोजाना रिकॉर्ड ऑनलाइन दर्ज कराने से पोषाहार व्यवस्था में जवाबदेही बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।

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